Market Ticker

Translate

Friday, December 10, 2010

BSE સેન્સેક્સમાં 267 પોઈન્ટનો ઉછાળો

IIP ના અપેક્ષાથી સારા આંકડાને પગલે આજે મુંબઈ શેરબજાર 1.39 ટકા વધીને બંધ રહ્યું હતું.


દિવસ દરમિયાન BSE સેન્સેક્સ ઉપરમાં 19,537.40 અને નીચામાં 19,074.57 પોઈન્ટની રેન્જમાં ટ્રેડ થયા બાદ 266.53 પોઈન્ટ વધીને 19,508.89 પોઈન્ટની સપાટીએ બંધ રહ્યો હતો.

નેશનલ સ્ટોક એક્સચેંજનો નિફ્ટી 5,865.50 અને 5,721.15 પોઈન્ટની સપાટી વચ્ચે ટ્રેડ થયા બાદ 90.85 પોઈન્ટ વધીને 5,857.35 પોઈન્ટની સપાટીએ બંધ રહ્યો હતો.

BSE
મિડકેપ અને BSE સ્મોલકેપ ઈન્ડેક્સ અનુક્રમે 2.02 ટકા વધીને અને 2.36 ટકા વધીને બંધ રહ્યા હતા.

અપેક્ષાથી સારો દેખાવ : ઓક્ટોબરમાં IIP 10.8%

અપેક્ષાથી ઉમદા દેખાવ કરતાં ઓક્ટોબરમાં ઔદ્યોગિક ઉત્પાદન આંક ( IIP) વધીને 10.8 ટકા નોંધાયો હતો. સપ્ટેમ્બરમાં


IIP માત્ર 4.4 ટકા હતો.

ઓટો મોબાઈલ , ઈલેક્ટ્રોનિક ગૂડ્ઝ અને પાવર ક્ષેત્રની સારી કામગીરીને પગલે બે મહિનાના લાંબા ગાળા બાદ ઔદ્યોગિક ઉત્પાદન આંકમાં દ્વીઅંકી વૃદ્ધિ જોવા મળી હતી.

અત્રે ઉલ્લેખનીય છે કે એક વર્ષ અગાઉના આજ સમયગાળા દરમિયાન દેશનો ઔદ્યોગિક ઉત્પાદન આંક 10.1 ટકા નોંધાયો હતો.

જુલાઈમાં 15 ટકાની સપાટી વટાવી ગયેલો IIP ઓગસ્ટમાં ઘટીને 6.91 ટકા થઈ ગયો હતો અને ત્યારબાદ સપ્ટેમ્બરમાં તે વધુ ઘટીને માત્ર 4.4 ટકા નોંધાયો હતો.

હાલનો IIP નો વૃદ્ધિદર અર્થતંત્રમાં ફરી ચેતનાનો સંચાર થયો હોવાનો સ્પષ્ટ સંકેત આપે છે , તેમ કાર્યક્રમ અમલીકરણ પ્રધાન શ્રીપ્રકાશ જયસ્વાલે જણાવ્યું હતું.

સરકારના જણાવ્યા અનુસાર શિપ બિલ્ડિંગ , પાવર ઈક્વિપમેન્ટ અને જનરેટર્સના ક્ષેત્રે સારી કામગીરીને પગલે IIP માં સુધારો જોવાયો છે.

ઉપરાંત વાહનો અને કન્ઝ્યુમર ડ્યુરેબલ્સના ઉત્પાદનમાં વધારાને કારણે પણ દેશનો ઔદ્યોગિક ઉત્પાદન આંક વધ્યો છે.

સરકારે જારી કરેલા IIP ના આંકડા અનુસાર ઓક્ટોબરમાં ઉત્પાદન ક્ષેત્રમાં 11.3 ટકા , વીજળીના ઉત્પાદનમાં 8.8 ટકાની વૃદ્ધિ જોવા મળી છે જે , અગાઉના વર્ષના આજ સમયગાળા દરમિયાન અનુક્રમે 10.8 ટકા અને 4 ટકા હતી.

જોકે , સમીક્ષા હેઠળના સમયગાળા દરમિયાન માઈનિંગ ક્ષેત્રનો દેખાવ કથળ્યો હતો. અગાઉના વર્ષના આજ સમયગાળાના 9.1 ટકા સામે વખતે માઈનિંગ ક્ષેત્રે માત્ર 6.5 ટકાનો વૃદ્ધિ દર જોવા મળ્યો હતો.

કેપિટલ ગૂડ્ઝમાં ઓક્ટોબરમાં 22 ટકાનો નોંધપાત્ર વૃદ્ધિ દર જોવા મળ્યો હતો.

Monday, December 6, 2010

क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड प्वाइंट में छुपा बचत का नुस्खा

अधिक ब्याज दरों की वजह से क्रेडिट कार्ड की आलोचना की जाती रही है।

हालांकि, प्लास्टिक मनी के बेजा इस्तेमाल या लापरवाही की वजह से भी ग्राहकों को नुकसान होता रहा है। क्रेडिट कार्ड से आप कभी भी खरीदारी कर सकते हैं और बाद में इसका भुगतान करते हैं। प्लास्टिक कार्ड के साथ सिर्फ यही फायदा नहीं है। अगर आप इसे बुद्धिमानी से इस्तेमाल करें तो यही कार्ड आपके लिए बेहतरीन टूल हो सकता है। आप अपनी हर खरीदारी पर 10 फीसदी तक की बचत कर सकते हैं।

लॉयल्टी प्रोग्राम की दुनिया में आपका स्वागत है। आज हम आपको सही लॉयल्टी प्रोग्राम का चुनाव करने के बारे में बता रहे हैं। हम आपको यहां लॉयल्टी प्रोग्राम और उसके इस्तेमाल के तरीके के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। अधिकतर लॉयल्टी प्रोग्राम के तहत क्रेडिट कार्ड से किए गए हर खर्च पर रिवॉर्ड प्वाइंट मिलता है। कार्ड इंडस्ट्री में इसे 'अर्न्ड प्वाइंट' कहते हैं। इस अर्न्ड प्वाइंट को ट्रैवल, शॉपिंग, डाइनिंग और एंटरटेनमेंट के लिए भुनाया जा सकता है। अमेरिकन एक्सप्रेस के सीईओ शैलेश बैदवान का कहना है, 'हममें से कई लोग इसे ठीक से समझ नहीं पाते हैं, जबकि इन कार्यक्रमों को कार्ड सदस्यों, मर्चेंट और कार्ड कंपनियों के हित में डिजाइन किया जाता है।
दरअसल, रिवॉर्ड प्वाइंट अब कंज्यूमर करेंसी का नया रूप है। उपभोक्ता इसे भुना सकते हैं, दूसरे को दे सकते हैं और कई तरह के प्रोडक्ट की खरीदारी में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।'

हालांकि, कई बार कार्ड सदस्य बाजार में फैले भ्रम से लॉयल्टी प्रोग्राम का फायदा नहीं उठा पाते हैं। अक्सर गलत विकल्प का चुनाव करने से ग्राहकों को अर्न्ड प्वाइंट का खास फायदा नहीं मिल पाता है। ऐसे में अच्छा रिटर्न पाने के लिए प्लास्टिक कार्ड की तरफ से दिए गए ऑफर को ठीक से समझना चाहिए। लंबी अवधि में आपको कम खर्च पर भी अर्न्ड प्वाइंट अधिक मिलते हैं। इसलिए आपको लॉयल्टी कार्यक्रम का चुनाव करने में सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी कार्ड सदस्य को लॉयल्टी प्रोग्राम का चयन करने के दौरान अर्न्ड प्वाइंट और उसे भुनाने की रफ्तार का आकलन करना चाहिए।

सामान्य अर्न : आमतौर पर प्रोडक्ट वैल्यू की कीमत को ध्यान में रखकर कार्ड कंपनियां रिवॉर्ड प्वाइंट ऑफर करती हैं। अमेरिकन एक्सप्रेस के बैदवान का कहना है, 'सामान्य स्थिति में कार्ड सदस्य हर 40-200 रुपए के खर्च पर 1 प्वाइंट हासिल करता है। यह काफी हद तक बैंक और कार्ड पर निर्भर करता है।' अमेरिकन एक्सप्रेस हर 40 रुपए के खर्च पर 1 प्वाइंट देता है। एचडीएफसी बैंक टाइटेनियम क्रेडिट कार्ड पर हर 150 रुपए के खर्च पर दो प्वाइंट देता है। इसके लिए एक स्टेटमेंट साइकल में 15,000 रुपए सीमा रखी गई है। वहीं, जब आपका खर्च 15,000 रुपए से ऊपर हो जाए, तब आपको 50 फीसदी अधिक रिवॉर्ड प्वाइंट मिलते हैं। यानी 15,000 रुपए से अधिक हर 150 रुपए खर्च करने पर आपको 3 प्वाइंट मिलते हैं। इसी तरह से सिटी क्रेडिट कार्ड आपको सप्ताहांत में हर 200 रुपए खर्च करने पर 5 कैश रिवॉर्ड प्वाइंट देता है, वहीं सप्ताह के सामान्य दिनों में यही घटकर 1 कैश रिवॉर्ड प्वाइंट हो जाता है। बैदवान कहते हैं, 'कुछ प्रोग्राम में खास कैटेगरी के तहत खर्च करने पर रिवॉर्ड प्वाइंट नहीं दिया जाता है। इसमें पेट्रोल-डीजल पर किए जाने वाला खर्च शामिल है। इसलिए ग्राहकों को इसका भी ध्यान रखना चाहिए।'

बोनस प्वाइंट: कुछ प्रोग्राम में ग्राहकों को बोनस प्वाइंट प्रोग्राम ऑफर किया जाता है। इसके तहत ग्राहक दोगुने, तिगुने या 10 गुना तक प्वाइंट हासिल कर पाते हैं। इसके लिए आप सीमित अवधि के लिए मिलने वाले ऑफर का ध्यान रखें। वहीं कुछ खास मर्चेंट से खरीदारी करने पर भी बोनस प्वाइंट ऑफर किया जाता है। आपको हासिल किए गए रिवॉर्ड या कैश प्वाइंट के भुनाने की अंतिम तारीख का भी ख्याल रखना चाहिए। अगर आप भुनाने की अंतिम तारीख का ख्याल नहीं रखेंगे, तब आपके द्वारा हासिल किए गए सभी प्वाइंट बेकार हो जाएंगे। हालांकि कुछ क्रेडिट कार्ड नॉन-एक्सपायरी प्वाइंट की इजाजत भी देते हैं। इंटरनेशनल मनी मैटर्स के चीफ फाइनेंशियल प्लानर और एमडी लोवाई नवलखी का कहना है, 'अगर आपके कार्ड पर नॉन-एक्सपायरी प्वाइंट की सुविधा मिल रही है, तब आपको हर तरह की खरीदारी क्रेडिट कार्ड से ही करनी चाहिए। इससे आप कम से कम समय में अधिक से अधिक प्वाइंट हासिल कर पाएंगे।'

रिवॉर्ड कैटेगरी की जांच करें: अधिकतर प्रोग्राम के तहत कार्ड सदस्यों को प्वाइंट का इस्तेमाल करने के कई विकल्प दिए जाते हैं। इसमें गारमेंट, होम अप्लायंसेज, कॉस्मेटिक, गिफ्ट वाउचर और चैरिटी डोनेशन जैसे विकल्प प्रमुख हैं। हालांकि, आपको ऐसे प्रोग्राम का चयन करना चाहिए जिसमें लाइफस्टाइल से जुड़ी चीजों के लिए अधिक प्वाइंट मिलता हो।

एयर माइल्स में कनवर्ट करना: कुछ बैंक ग्राहकों को रिवॉर्ड प्वाइंट को एयर माइल्स में तब्दील करने की सुविधा देते हैं। इसमें ग्राहक अपने रिवॉर्ड प्वाइंट से एयर टिकट खरीद सकता है। इस प्रोग्राम के तहत घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस का टिकट खरीदने की सुविधा है या नहीं? इसकी जांच करें।

लॉयल्टी प्रोग्राम का सही ढंग से इस्तेमाल करना जरूरी: आपको सही लॉयल्टी प्रोग्राम का चयन करना चाहिए। आपको इस्तेमाल करने के तरीकों का पता होना चाहिए। अगर आप लॉयल्टी प्रोग्राम का अधिकतम लाभ उठाना चाहते हैं, तब आपको इसके अनुसार योजना बनानी होगी। यहां पर कुछ आसान तरीके सुझाए जा रहे हैं जिनसे आप तेजी से रिवॉर्ड प्वाइंट हासिल कर सकते हैं।

अधिक से अधिक प्वाइंट हासिल करने का तरीका: आप अपने सभी खर्च एक ही कार्ड से करें। इससे आप ज्यादा तेजी से प्वाइंट हासिल कर पाते हैं। बड़ी खरीदारी भी इसी कार्ड से करें।

रोजमर्रा की खरीदारी कार्ड से करें: आप अपने सभी खर्चों को कार्ड से करने की कोशिश करें। जैसे सुपरमार्केट, गैस स्टेशन, सिनेमा में किए जाने वाले खर्चों को कार्ड से ही करें।

यूटिलिटी बिल का भुगतान कार्ड से करें: बिजली का बिल, बीमा प्रीमियम और फोन बिल के भुगतान कार्ड से करें। हालांकि, क्रेडिट कार्ड से मिलने वाले इन फायदों का लाभ उठाने के साथ ही अपनी जरूरत का भी ध्यान रखें। नवलखी का कहना है, 'अगर आप बार-बार ट्रैवल करते हैं, तब क्रेडिट कार्ड प्रोग्राम को फ्रीक्वेंट फ्लायर प्रोग्राम के साथ जोड़ने की कोशिश करें। अगर आप नियमित तौर पर खरीदारी करने का शौक रखते हैं, तब उससे हासिल होने वाले प्वाइंट को अपने पसंदीदा स्टोर के लिए वाउचर हासिल करने से जुड़े प्रोग्राम का चुनाव करें। कार्ड से मिलने वाले प्वाइंट का बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल तभी किया जा सकता है, जब आप नियमित तौर पर प्वाइंट को अपनी जरूरत के प्रोडक्ट संबंधी वाउचर के लिए कनवर्ट कराएं।'

एंडॉमेंट प्लान के झांसे में नहीं आएं

प्रीति कुलकर्णी
एक पुरानी कहावत है, जब चीजें ज्यादा बदलती हैं, तब वह वैसी ही बनी रहती हैं। यह काफी हद

तक भारतीय बीमा इंडस्ट्री के बारे में सही लगता है। भारत में बीमा इंडस्ट्री लगातार बढ़ा है, चाहे यह बिक्री की वजह से हो या फिर गलत तरीके से बेचे गए यूलिप की वजह से हो। इस साल के शुरू में जब एजेंट के कमीशन में की गई कटौती के बाद यूलिप मुश्किल के दौर से गुजर रहा है। निश्चित तौर पर इसका असर बीमा एजेंटों पर पड़ा है और वह कम कमीशन वाले यूलिप के नए वर्जन को बेचने के बजाए नया रास्ता तलाश लिया है। बीमा एजेंटों की अब अधिक कमिशन वाले एंडॉमेंट प्लान में बढ़ रही है।

बीमा उत्पाद बेचने की नई रणनीति
बीमा एजेंटों ने यूलिप को बीमा, निवेश और कर बचाने वाले प्रोडक्ट यानी तिहरा फायदा देने वाले प्रोडक्ट के रूप में प्रचारित किया। हालांकि, बाजार से जुड़े प्रोडक्ट होने की वजह से बीमाधारकों का विश्वास हिल गया।

यूलिप में किए गए निवेश का वैल्यू अचानक मुश्किलों में घिर सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि आप एंडॉमेंट प्लान में निवेश करें। यह बीमा एजेंटों की नई भाषा है। एंडॉमेंट प्लान बीमाधारकों को बेहतर रिटर्न का वादा करता है। बीमा कंपनी हर साल बोनस के रूप में स्थाई रिटर्न भी देती है। साथ ही बीमाधारकों को लाइफ कवर भी मिलता है। बीमा एजेंट इन पहलुओं को बड़े ही आकर्षक अंदाज में संभावित ग्राहकों को समझाते दिख जाते हैं।

फाइनेंशियल लेखक उदय कुलकर्णी का कहना है, 'पिछले दिनों मेरे सामने एक मामला आया, जिसमें बीमा एजेंट एक व्यक्ति को यूलिप में किए गए निवेश को भुनाकर एंडॉमेंट प्लान लेने की बात समझा रहा था।' यह तय है कि एंडॉमेंट प्लान में एक निश्चित रिटर्न मिलता है। कुलकर्णी का कहना है, 'अक्सर लोग यूलिप पर अधिक कमीशन ढांचा की बात करते रहते हैं, लेकिन लोगों का ध्यान एंडॉमेंट प्लान में लगने वाले शुल्क की ओर कम ही जा रहा है। अगर यूलिप पर 8-10 फीसदी कमीशन लिया जाता है, तो एंडॉमेंट प्लान में यह पहले साल में 30-40 फीसदी तक हो सकता है।'

इससे साफ हो जाता है कि बीमा एजेंटों में एंडॉमेंट प्लान के लिए अचानक उमड़े प्रेम की वजह क्या है। फिर, बीमा नियामक ने किसी भी परंपरागत पॉलिसी में शुल्क को कम करने या सीमा निर्धारित करने से इनकार कर दिया है। इससे साफ है कि बीमा एजेंटों के पास गलत तरीके से बीमा प्रोडक्ट बेचने की गुंजाइश बची हुई है। आप इसे इस रूप में भी समझ सकते हैं कि नई बोतल में नई शराब वाली कहावत को चरितार्थ करने की कोशिश हो रही है।

एंडॉमेंट पॉलिसी को डिजाइन करते समय इसे डेट से जोड़ कर रखा गया है यानी इस पॉलिसी की रकम को शेयरों की जगह स्वीकृत डेट या सरकारी सिक्योरिटीज में ही निवेश किया जा सकता है। इस कारण यह कम रिटर्न देता है। एक सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लान (सीएफपी) पंकज मथपाल का कहना है, 'अधिकतर एंडॉमेंट पॉलिसी सालाना करीब 5 फीसदी का रिटर्न देते हैं और कई बार अच्छी परिस्थिति में भी यह 6 फीसदी तक ही जाता है। खासकर एलआईसी पॉलिसी में यह 6 फीसदी के आस-पास रिटर्न मिलता है।'

आप इस आंकड़े को अलग कर दें। अगर वास्तविक रिटर्न इससे ज्यादा भी है तो भी आपको पता नहीं चलेगा। बीमा कंपनियां यह बताने के लिए बाध्य नहीं है कि आपके पैसे को कहां निवेश किया गया है या आपके पैसे के कितने हिस्से का निवेश किया गया है। इन योजनाओं के ब्राउशर में भुगतान किए गए प्रीमियम में से काटे गए शुल्क और बाकी बचे पैसे के निवेश की जानकारी नहीं दी जाती है।

हालांकि, पारदर्शिता के अभाव का फायदा बीमा एजेंट उठाते हैं। एजेंट बीमाधारकों को बताते हैं कि यूलिप में भारी-भरकम कमीशन काट लिया जाता है, लेकिन एंडॉमेंट में लगाए गए सभी पैसे का निवेश किया जाता है। यह सही नहीं है। एंडॉमेंट प्लान में यूलिप की तुलना में अधिक कमीशन दिया जाता है। यहां पर बीमा कंपनी यूलिप की तरह वास्तविक ब्रेक अप देने के लिए बाध्य नहीं है। बहरहाल, यूलिप प्रोडक्ट में भी कई तरह की पारदर्शिता का अभाव होता है, बावजूद इसके हमें यह पता होता है कि हमारे कितने पैसे का निवेश किया गया है।

अधिक शुल्क और कम रिटर्न

एंडॉमेंट पॉलिसी में बीमाधारकों को एक खास रकम के लिए बीमित किया जाता है। इस रकम को सम एश्योर्ड कहा जाता है। बीमा कंपनी समय समय पर बोनस की भी घोषणा करती है, जो सम एश्योर्ड का एक खास फीसदी होता है। जब पॉलिसी परिपक्व होता है, तब सम एश्योर्ड के साथ इकट्ठा बोनस भी जोड़कर दे दिया जाता है।

यूलिप के लोकप्रिय होने से पहले बीमा एजेंट गलत तरीके से एंडॉमेंट प्लान को बेचते थे। अगर आपने 25 साल के लिए पॉलिसी ली है और इसका सम एश्योर्ड 10 लाख रुपए है, तब आपको सालाना 38,000 से 40,000 रुपए के प्रीमियम का भुगतान करना होता है। अगर कंपनी 5 फीसदी बोनस की घोषणा करती है तब यह 50,000 रुपए होता है। ऐसे में बीमा एजेंट आपको कह सकता है कि आपको मिलने वाला बोनस आपके प्रीमियम से अधिक है। निश्चित तौर पर ऐसा है, लेकिन वह यह कभी नहीं बताते हैं कि बोनस पर किसी तरह का ब्याज नहीं मिलेगा। यानी अगले 25 सालों तक यह 50,000 रुपए से बढ़कर 50,001 रुपए नहीं होगा। इससे पता चलता है कि आपके एंडॉमेंट प्लान में किए गए निवेश पर कम रिटर्न मिलता है। लैडर7 फाइनेंशियल सविर्सेज के सीएफएपी सुरेश सदगोपन का कहना है कि अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं तो डेट में निवेश करने वाले पॉलिसी बेहतर विकल्प नहीं हैं। सुरेश एंडॉमेंट प्लान को इसके लिए सही नहीं मानते हैं। वह कहते हैं कि लंबी अवधि के लिए इसकी जगह पर डायवर्सिफाइन इक्विटी फंड में पैसा निवेश करना चाहिए। फिर, जो लोग इक्विटी के साथ सहज नहीं हैं, उन्हें पीपीएफ और टर्म प्लान का कॉम्बिनेशन लेना चाहिए। अब अगली बार आपका एजेंट आपको एंडॉमेंट पॉलिसी लेने का सुझाव दे, तब आप सालाना बोनस के झांसे में नहीं आएं। इससे बेहतर होगा कि आप एक आसान टर्म प्लान के साथ लार्ज कैप इक्विटी म्यूचुअल फंड आपको बेहतर रिटर्न दे सकता है।

Economic Event Calendar

Economic Calendar >> Add to your site

Best Mutual Funds

Recent Posts

Search This Blog

IPO's Calendar

Market Screener

Industry Research Reports

NSE BSE Tiker

Custom Pivot Calculator

Popular Posts

Market & MF Screener

Company Research Reports