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Monday, December 6, 2010

एंडॉमेंट प्लान के झांसे में नहीं आएं

प्रीति कुलकर्णी
एक पुरानी कहावत है, जब चीजें ज्यादा बदलती हैं, तब वह वैसी ही बनी रहती हैं। यह काफी हद

तक भारतीय बीमा इंडस्ट्री के बारे में सही लगता है। भारत में बीमा इंडस्ट्री लगातार बढ़ा है, चाहे यह बिक्री की वजह से हो या फिर गलत तरीके से बेचे गए यूलिप की वजह से हो। इस साल के शुरू में जब एजेंट के कमीशन में की गई कटौती के बाद यूलिप मुश्किल के दौर से गुजर रहा है। निश्चित तौर पर इसका असर बीमा एजेंटों पर पड़ा है और वह कम कमीशन वाले यूलिप के नए वर्जन को बेचने के बजाए नया रास्ता तलाश लिया है। बीमा एजेंटों की अब अधिक कमिशन वाले एंडॉमेंट प्लान में बढ़ रही है।

बीमा उत्पाद बेचने की नई रणनीति
बीमा एजेंटों ने यूलिप को बीमा, निवेश और कर बचाने वाले प्रोडक्ट यानी तिहरा फायदा देने वाले प्रोडक्ट के रूप में प्रचारित किया। हालांकि, बाजार से जुड़े प्रोडक्ट होने की वजह से बीमाधारकों का विश्वास हिल गया।

यूलिप में किए गए निवेश का वैल्यू अचानक मुश्किलों में घिर सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि आप एंडॉमेंट प्लान में निवेश करें। यह बीमा एजेंटों की नई भाषा है। एंडॉमेंट प्लान बीमाधारकों को बेहतर रिटर्न का वादा करता है। बीमा कंपनी हर साल बोनस के रूप में स्थाई रिटर्न भी देती है। साथ ही बीमाधारकों को लाइफ कवर भी मिलता है। बीमा एजेंट इन पहलुओं को बड़े ही आकर्षक अंदाज में संभावित ग्राहकों को समझाते दिख जाते हैं।

फाइनेंशियल लेखक उदय कुलकर्णी का कहना है, 'पिछले दिनों मेरे सामने एक मामला आया, जिसमें बीमा एजेंट एक व्यक्ति को यूलिप में किए गए निवेश को भुनाकर एंडॉमेंट प्लान लेने की बात समझा रहा था।' यह तय है कि एंडॉमेंट प्लान में एक निश्चित रिटर्न मिलता है। कुलकर्णी का कहना है, 'अक्सर लोग यूलिप पर अधिक कमीशन ढांचा की बात करते रहते हैं, लेकिन लोगों का ध्यान एंडॉमेंट प्लान में लगने वाले शुल्क की ओर कम ही जा रहा है। अगर यूलिप पर 8-10 फीसदी कमीशन लिया जाता है, तो एंडॉमेंट प्लान में यह पहले साल में 30-40 फीसदी तक हो सकता है।'

इससे साफ हो जाता है कि बीमा एजेंटों में एंडॉमेंट प्लान के लिए अचानक उमड़े प्रेम की वजह क्या है। फिर, बीमा नियामक ने किसी भी परंपरागत पॉलिसी में शुल्क को कम करने या सीमा निर्धारित करने से इनकार कर दिया है। इससे साफ है कि बीमा एजेंटों के पास गलत तरीके से बीमा प्रोडक्ट बेचने की गुंजाइश बची हुई है। आप इसे इस रूप में भी समझ सकते हैं कि नई बोतल में नई शराब वाली कहावत को चरितार्थ करने की कोशिश हो रही है।

एंडॉमेंट पॉलिसी को डिजाइन करते समय इसे डेट से जोड़ कर रखा गया है यानी इस पॉलिसी की रकम को शेयरों की जगह स्वीकृत डेट या सरकारी सिक्योरिटीज में ही निवेश किया जा सकता है। इस कारण यह कम रिटर्न देता है। एक सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लान (सीएफपी) पंकज मथपाल का कहना है, 'अधिकतर एंडॉमेंट पॉलिसी सालाना करीब 5 फीसदी का रिटर्न देते हैं और कई बार अच्छी परिस्थिति में भी यह 6 फीसदी तक ही जाता है। खासकर एलआईसी पॉलिसी में यह 6 फीसदी के आस-पास रिटर्न मिलता है।'

आप इस आंकड़े को अलग कर दें। अगर वास्तविक रिटर्न इससे ज्यादा भी है तो भी आपको पता नहीं चलेगा। बीमा कंपनियां यह बताने के लिए बाध्य नहीं है कि आपके पैसे को कहां निवेश किया गया है या आपके पैसे के कितने हिस्से का निवेश किया गया है। इन योजनाओं के ब्राउशर में भुगतान किए गए प्रीमियम में से काटे गए शुल्क और बाकी बचे पैसे के निवेश की जानकारी नहीं दी जाती है।

हालांकि, पारदर्शिता के अभाव का फायदा बीमा एजेंट उठाते हैं। एजेंट बीमाधारकों को बताते हैं कि यूलिप में भारी-भरकम कमीशन काट लिया जाता है, लेकिन एंडॉमेंट में लगाए गए सभी पैसे का निवेश किया जाता है। यह सही नहीं है। एंडॉमेंट प्लान में यूलिप की तुलना में अधिक कमीशन दिया जाता है। यहां पर बीमा कंपनी यूलिप की तरह वास्तविक ब्रेक अप देने के लिए बाध्य नहीं है। बहरहाल, यूलिप प्रोडक्ट में भी कई तरह की पारदर्शिता का अभाव होता है, बावजूद इसके हमें यह पता होता है कि हमारे कितने पैसे का निवेश किया गया है।

अधिक शुल्क और कम रिटर्न

एंडॉमेंट पॉलिसी में बीमाधारकों को एक खास रकम के लिए बीमित किया जाता है। इस रकम को सम एश्योर्ड कहा जाता है। बीमा कंपनी समय समय पर बोनस की भी घोषणा करती है, जो सम एश्योर्ड का एक खास फीसदी होता है। जब पॉलिसी परिपक्व होता है, तब सम एश्योर्ड के साथ इकट्ठा बोनस भी जोड़कर दे दिया जाता है।

यूलिप के लोकप्रिय होने से पहले बीमा एजेंट गलत तरीके से एंडॉमेंट प्लान को बेचते थे। अगर आपने 25 साल के लिए पॉलिसी ली है और इसका सम एश्योर्ड 10 लाख रुपए है, तब आपको सालाना 38,000 से 40,000 रुपए के प्रीमियम का भुगतान करना होता है। अगर कंपनी 5 फीसदी बोनस की घोषणा करती है तब यह 50,000 रुपए होता है। ऐसे में बीमा एजेंट आपको कह सकता है कि आपको मिलने वाला बोनस आपके प्रीमियम से अधिक है। निश्चित तौर पर ऐसा है, लेकिन वह यह कभी नहीं बताते हैं कि बोनस पर किसी तरह का ब्याज नहीं मिलेगा। यानी अगले 25 सालों तक यह 50,000 रुपए से बढ़कर 50,001 रुपए नहीं होगा। इससे पता चलता है कि आपके एंडॉमेंट प्लान में किए गए निवेश पर कम रिटर्न मिलता है। लैडर7 फाइनेंशियल सविर्सेज के सीएफएपी सुरेश सदगोपन का कहना है कि अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं तो डेट में निवेश करने वाले पॉलिसी बेहतर विकल्प नहीं हैं। सुरेश एंडॉमेंट प्लान को इसके लिए सही नहीं मानते हैं। वह कहते हैं कि लंबी अवधि के लिए इसकी जगह पर डायवर्सिफाइन इक्विटी फंड में पैसा निवेश करना चाहिए। फिर, जो लोग इक्विटी के साथ सहज नहीं हैं, उन्हें पीपीएफ और टर्म प्लान का कॉम्बिनेशन लेना चाहिए। अब अगली बार आपका एजेंट आपको एंडॉमेंट पॉलिसी लेने का सुझाव दे, तब आप सालाना बोनस के झांसे में नहीं आएं। इससे बेहतर होगा कि आप एक आसान टर्म प्लान के साथ लार्ज कैप इक्विटी म्यूचुअल फंड आपको बेहतर रिटर्न दे सकता है।

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